गर्भावस्था
हम आमतौर पर गर्भवती महिलाओं और उनकी ज़रूरतों पर बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन जैसे ही बच्चा जन्म लेता है, सारा ध्यान नवजात की ओर केंद्रित हो जाता है। माँ अपनी सारी ऊर्जा अपने नए बच्चे को देती हैं और कई बार अपनी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं। एक नई माँ को अपने जीवन और शरीर में भारी शारीरिक व मानसिक परिवर्तन महसूस होते हैं। उसे दोबारा संतुलन पाने के लिए दोस्तों और परिवार से सहयोग की आवश्यकता होती है।
गर्भावस्था
बहुत से लोग जो माता-पिता बनना चाहते हैं, उन्हें संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है। यह शुरुआत में एक बहुत बड़ा झटका जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन आज बच्चों को पाने के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे गोद लेना, सरोगेसी और प्रजनन उपचार। किसी एक विकल्प को चुनने के कारण अक्सर जटिल और व्यक्तिगत होते हैं, लेकिन सभी रास्ते समान रूप से मान्य हैं।
गर्भावस्था
हम सबने सुना है कि एक बच्चे को पालने के लिए पूरे गाँव की ज़रूरत होती है, और प्रसव भी कभी अकेले करने की चीज़ नहीं है। महिलाएँ हमेशा शारीरिक और भावनात्मक रूप से एक-दूसरे का समर्थन करती रही हैं जब वे प्रसव के लिए तैयार होती हैं, बच्चे को जन्म देती हैं, और अपने बच्चे का दुनिया में स्वागत करती हैं। आजकल यह भूमिका आमतौर पर दाइयों और डौलाओं को सौंपी जाती है।