गर्भावस्था
मानव शरीर को प्रजनन के लिए ही तैयार किया गया है ताकि विलुप्ति को रोका जा सके। महिलाओं के शरीर में एक विशेष अलर्ट सिस्टम होता है, जिसे “बायोलॉजिकल क्लॉक” कहा जाता है, जो दिमाग में काफी उथल-पुथल मचा सकती है।
गर्भावस्था
हम आमतौर पर गर्भवती महिलाओं और उनकी ज़रूरतों पर बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन जैसे ही बच्चा जन्म लेता है, सारा ध्यान नवजात की ओर केंद्रित हो जाता है। माँ अपनी सारी ऊर्जा अपने नए बच्चे को देती हैं और कई बार अपनी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं। एक नई माँ को अपने जीवन और शरीर में भारी शारीरिक व मानसिक परिवर्तन महसूस होते हैं। उसे दोबारा संतुलन पाने के लिए दोस्तों और परिवार से सहयोग की आवश्यकता होती है।
यौन
मानव इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) एक संक्रामक जीवाणु है, जो इलाज न होने की स्थिति में अधिग्रहीत इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) उत्पन्न करता है, एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और यह बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।