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गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय ग्रीवा जांच और विकारों की रोकथाम के बारे में आपको जो कुछ जानना चाहिए

गर्भाशय ग्रीवा के क्या कार्य होते हैं? आपको कितनी बार गर्भाशय ग्रीवा जांच करवानी चाहिए? नई गाइडलाइनों से पाप स्मीयर की अनुशंसित अवधि में क्या बदलाव हुआ है? गर्भाशय ग्रीवा, उसकी सेहत, विकारों और जांच की विस्तृत जानकारी जानें।

गर्भाशय ग्रीवा का आरेख जिसमें ग्रीवा स्वास्थ्य, जांच और विकार रोकथाम की जानकारी दी गई है।

गर्भाशय ग्रीवा महिला प्रजनन तंत्र का हिस्सा है। योनि नली के अंतिम छोर पर स्थित गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय की सुरक्षा करती है और गर्भावस्था व प्रसव के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस लेख में आप जानेंगी:

  • गर्भाशय ग्रीवा की बनावट और स्थान
  • आम गर्भाशय ग्रीवा विकार
  • गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के जोखिम
  • गर्भाशय ग्रीवा की जांच
  • गर्भाशय ग्रीवा रोगों से बचाव के उपाय

गर्भाशय ग्रीवा की संरचना

गर्भाशय ग्रीवा महिला प्रजनन तंत्र का हिस्सा है। आकार में छोटी होते हुए भी यह गर्भावस्था, सामान्य प्रसव, प्रजनन प्रबंधन और माहवारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गर्भाशय ग्रीवा एक बेलनाकार अंग है, जो गर्भाशय के निचले सिरे पर स्थित है। यह गर्भाशय को योनि से जोड़ती है। यह आम तौर पर 4 सेंटीमीटर लंबी और 2-3 सेंटीमीटर व्यास में होती है। गर्भाशय ग्रीवा तंतु-मांसपेशीय ऊतक से बनी है और दो मुख्य भागों में बंटी होती है।

एक्टोसर्विक्स योनि के अंतिम छोर पर स्थित बाहरी भाग है, जिसमें एक छोटा सा छिद्र जिसे एक्सटर्नल ओएस कहते हैं, होता है। एंडोसर्विक्स अंदर की नली होती है, जो गर्भाशय की ओर रहती है और इंटरनल ओएस पर समाप्त होती है।

गर्भाशय ग्रीवा की नली स्तम्भकीय ऊतक (कॉलमनर एपिथीलियम) से बनी होती है, जो चिपचिपा द्रव बनाती है, जिसकी सांद्रता माहवारी चक्र के दौरान बदलती रहती है। इसमें बहुत सारी ग्रंथिया और तंत्रिका छोर होते हैं। इसकी स्थिति माहवारी, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौर में बदलती रहती है।

गर्भाशय ग्रीवा के कार्य

गर्भाशय ग्रीवा म्यूकस (म्यूकस द्रव) बनाती है और तरल पदार्थों को गर्भाशय तक ले जाने या वहां से बाहर निकलने देती है। यह छोटा सा अंग सामान्य प्रसव के समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गर्भाशय ग्रीवा के मुख्य कार्य:

  • गर्भाशय की सुरक्षा: यह योनि और गर्भाशय के बीच एक भौतिक अवरोध का काम करती है। इसका छोटा सा छिद्र माहवारी चक्र और गर्भावस्था के अनुसार आकार बदलता है, यह इतना बड़ा नहीं होता कि बाहरी वस्तुएं अंदर जा सकें। इसकी वजह से आप टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप आदि का सुरक्षा से इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • संक्रमण से सुरक्षा: यह संक्रमण होने पर सबसे पहले संकेत देती है। इसमें मौजूद ग्रंथियाँ हमेशा म्यूकस बनाती हैं, संक्रमण की स्थिति में यह द्रव रंग और गंध बदलता है एवं ऊपरी प्रजनन पथ की सुरक्षा करता है। यह हल्का अम्लीय होता है, जिससे बैक्टीरिया विकसित नहीं हो पाते।
  • शुक्राणु परिवहन: ओव्युलेशन के समय म्यूकस तरल और लचीला हो जाता है, साथ ही पीएच बढ़ जाता है, जिससे शुक्राणु आसानी से गर्भाशय तक पहुंच सकते हैं।
  • माहवारी प्रवाह: गर्भाशय ग्रीवा माहवारी के दौरान रक्त को गर्भाशय से योनि में जाने देती है।
  • गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान म्यूकस प्लग बन जाता है, जो भ्रूण को संक्रमण से सुरक्षा देता है। प्रसव से पहले यह प्लग टूट जाता है, जो डिलीवरी के आरंभ का पहला संकेत माना जाता है।
  • प्रसव: बच्चे के जन्म के समय गर्भाशय ग्रीवा फैल जाती है। म्यूकस प्लग हटने के बाद यह मुलायम और पतली हो जाती है। फैली हुई गर्भाशय ग्रीवा से प्रसव की अवधि का अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • उर्वरता का संकेत: गर्भाशय ग्रीवा का स्थान, बनावट और म्यूकस की मात्रा, माहवारी के विभिन्न चरणों की जानकारी देती है। ओवुलेशन के दौरान यह ऊपर उठकर चौड़ी होती जाती है और अधिक म्यूकस छोड़ती है।

गर्भाशय ग्रीवा की सेहत और विकार

गर्भाशय ग्रीवा की सेहत जटिल विषय है। यह विभिन्न संक्रमणों एवं विकारों के प्रति संवेदनशील है, जिनका कारण वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या परजीवी हो सकते हैं।

इसके सबसे संवेदनशील होने के कुछ कारण— इसका स्थान, हार्मोनल परिवर्तन, और कोशिकीय बनावट हैं।

स्थान की वजह से यह यौन संक्रमित बीमारियों (STIs) और योनि में मौजूद सूक्ष्मजीवों के संपर्क में रहती है।

शरीर में हार्मोन के बदलने से यह अंग भी प्रतिक्रिया करता है। हार्मोन का उतार-चढ़ाव (माहवारी, गर्भावस्था, रजोनिवृत्ति) गर्भाशय ग्रीवा म्यूकस की मात्रा एवं प्रकृति बदलता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।

गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएँ अन्य प्रजनन अंगों की अपेक्षा संक्रमण और कैंसर की ओर ज्यादा संवेदनशील होती हैं।

आमतौर पर गर्भाशय ग्रीवा के संक्रमण / बीमारी के लक्षण:

  • असामान्य योनि से रक्तस्राव (माहवारी के बीच, सेक्स के दौरान/बाद, रजोनिवृत्ति के बाद)
  • माहवारी के दौरान अधिक या ज्यादा समय तक रक्तस्राव
  • असामान्य योनि से स्त्राव (रक्तयुक्त, ग्रे, हरा, पानी जैसा या पनीर जैसा)
  • गंध में बदलाव
  • निचले पेट में दर्द
  • यौन संबंध या मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट के प्रयोग में असुविधा
  • पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब करने की जरूरत

सबसे सामान्य गर्भाशय ग्रीवा विकार एवं रोग

सर्विसाइटिस

गर्भाशय ग्रीवा की सूजन, जो संक्रमण या किसी रसायन की वजह से होती है। इसमें असामान्य स्त्राव, सेक्स के दौरान दर्द और माहवारी के बीच रक्तस्राव हो सकता है।

सर्विकल एक्टॉपियन

इसमें गर्भाशय ग्रीवा के अंदर की कोशिकाएँ बाहर आ जाती हैं। आमतौर पर यह हानिरहित है, पर इससे स्त्राव और स्पॉटिंग बढ़ सकती है।

सर्विकल पॉलिप्स

ये छोटे, सौम्य (गैर-कैंसर) उभार होते हैं, जो कभी-कभी अनियमित रक्तस्राव या स्त्राव का कारण बन सकते हैं।

सर्विकल डिस्प्लेसिया

असामान्य कोशिकाएँ गर्भाशय ग्रीवा में विकसित हो जाती हैं। यह नियमित पाप स्मीयर जांच से पता चलता है। समय रहते इलाज न हो तो कैंसर में बदल सकती हैं।

सर्विकल इनकंपिटेंस

गर्भावस्था के दौरान जब गर्भाशय ग्रीवा समय से पहले खुल जाती है। इससे प्रीटरम डिलीवरी का रिस्क बढ़ जाता है।

सर्विकल स्टेनोसिस

गर्भाशय ग्रीवा का छिद्र संकरा हो जाता है, जिससे माहवारी रक्त बहाव में मुश्किल, अधिक दर्द और उर्वरता पर असर पड़ सकता है।

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर

गर्भाशय ग्रीवा में विकसित एक घातक रोग, जिसका मुख्य कारण एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) संक्रमण होता है।

नेबोथियन सिस्ट्स

गर्भाशय ग्रीवा पर छोटी, तरल से भरी गांठें, जो आमतौर पर हानिरहित हैं। नियमित पैल्विक जांच में इन्हें पाया जाता है। दर्द या असामान्य रक्तस्राव हो तो डॉक्टर इन्हें हटा सकते हैं।

सर्विकल इरोजन

गर्भाशय ग्रीवा की बाहरी सुरक्षात्मक कोशिका परत क्षतिग्रस्त हो जाती है। इससे संक्रमण का जोखिम, स्पॉटिंग, या स्त्राव हो सकता है।

सर्विकल फाइब्रॉइड्स

सौम्य ट्यूमर जो गर्भाशय ग्रीवा पर या पास में बढ़ सकते हैं। बड़े फाइब्रॉइड से पेट में दबाव, दर्द या असामान्य रक्तस्राव हो सकता है।

गर्भाशय ग्रीवा संक्रमण

क्लैमाइडिया, गोनोरिया, हर्पीज एवं अन्य संक्रमण गर्भाशय ग्रीवा को प्रभावित कर सकते हैं और कई लक्षण पैदा कर सकते हैं।

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गर्भाशय ग्रीवा विकारों के जोखिम कारक

  • असुरक्षित यौन संबंध व कई पार्टनर: बिना सुरक्षा के संबंध बनाना संक्रमण का खतरा बढ़ाता है, खासकर एचपीवी जैसे एसटीआई का। ये ना केवल कैंसर बल्कि सूजन भी पैदा कर सकते हैं।
  • धूम्रपान: यह प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है, गर्भाशय ग्रीवा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है व एचपीवी संक्रमण क्लियर करना मुश्किल बनाता है।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: खराब आदतें, एचआईवी/एड्स, पुरानी बीमारी या इम्यूनोसप्रेसिव दवा लेने से गर्भाशय ग्रीवा विकारों का खतरा बढ़ता है।
  • लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग: खास तौर पर 5 साल या ज्यादा, हालांकि बंद कर देने पर जोखिम कम होता है।
  • एकाधिक गर्भधारण: तीन या अधिक बार डिलीवरी से कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।
  • अनुवांशिकता: अगर आपकी मां, दादी या करीबी रिश्तेदार को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर रहा हो तो भविष्य में जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।
  • आयु: 35 से 44 वर्ष की महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर अधिक पाया जाता है।

गर्भाशय ग्रीवा जांच

गर्भाशय ग्रीवा जांच, जिसे पैप स्मीयर भी कहते हैं, एक प्रक्रिया है जिसमें आपकी स्त्री रोग विशेषज्ञ गर्भाशय ग्रीवा से स्वैब द्वारा कोशिकाएँ एकत्र करती हैं। इन्हें जांचा जाता है कि कहीं कैंसर या एचपीवी संक्रमण की संभावना तो नहीं है।

यह नियमित पैल्विक जांच के साथ की जाती है। 21 से 65 वर्ष की महिलाओं के लिए 3 वर्ष में एक बार पाप स्मीयर जांच कराना अनुशंसित है। 30-65 वर्ष की महिलाओं के लिए एचपीवी जांच हर 5 साल में की जा सकती है। यदि एचपीवी या अनेक पार्टनर या कोशिकीय असामान्यताएं पहले से हों तो जांच बार-बार करानी चाहिए।

पहले हर साल जांच की अनुशंसा थी, पर अब नए दिशा-निर्देशों के अनुसार हर 3-5 साल में ही पर्याप्त है, क्योंकि असामान्य कोशिकाओं को कैंसर बनने में समय लगता है।

असामान्य परिणाम आने पर आगे की जांचें

अगर आपके टेस्ट में कैंसर से जुड़े एचपीवी स्ट्रेन या असामान्य कोशिकाएँ दिखें, तो आगे की जांच जरूरी होगी।

कोल्पोस्कोपी

कोल्पोस्कोपी एक डायग्नोस्टिक जांच है, जिसमें डॉक्टर विशेष आवर्धक डिवाइस द्वारा गर्भाशय ग्रीवा, योनि व भगांकुर को नजदीक से देखते हैं। असामान्य कोशिकाएँ हाईलाइट करने के लिए घोल लगाया जाता है, जिससे बायोप्सी के लिए संदिग्ध क्षेत्र पहचाने जा सकें।

बायोप्सी

गर्भाशय ग्रीवा की थोड़ी सी ऊतक निकाली जाती है, जिसे माइक्रोस्कोप के नीचे जांचा जाता है, इससे कोशिकाओं के कैंसर बनने का पता चलता है।

क्या गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और अन्य विकारों से बचाव संभव है?

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर सबसे अधिक बचाव योग्य कैंसरों में से एक है। आप इसका जोखिम एचपीवी वैक्सीन लगवाकर बहुत हद तक कम कर सकती हैं और शुरुआती अवस्था में यह आसानी से ठीक भी हो जाता है।

रोकथाम के उपाय:

  • संभोग शुरू करने से पहले ही एचपीवी वैक्सीन लगवाएं
  • नियमित रूप से पाप स्मीयर/एचपीवी टेस्ट कराएँ
  • एचपीवी ट्रांसमिशन कम करने के लिए कंडोम का प्रयोग करें
  • यौन साझेदारों की संख्या सीमित रखें
  • धूम्रपान ना करें
  • समुचित आहार लें, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहे
  • नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव प्रबंधन करें
  • गर्भनिरोधक गोलियों का दीर्घकालिक उपयोग सीमित करें

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर केवल एक संभावित विकार है। संक्रमण से बार-बार सूजन और प्रजनन समस्याएँ हो सकती हैं।

गर्भाशय ग्रीवा संक्रमण से बचाव के उपाय:

  • सुरक्षित यौन संबंध बनाएं – हर बार नया कंडोम इस्तेमाल करें
  • नियमित स्त्री रोग परीक्षण और जांच कराती रहें
  • जननांग क्षेत्र को आगे से पीछे पोंछकर साफ करें
  • डूशिंग से बचें
  • कॉटन या प्राकृतिक कपड़े का अंडरवियर पहनें
  • संभोग या हस्तमैथुन के बाद पेशाब करें
  • डायबिटीज या प्रतिरक्षा प्रभावित बीमारियों को नियंत्रित रखें
  • एंटीबायोटिक का प्रयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर और पूरा कोर्स करें
  • बिना खुशबू वाले हल्के साबुन का प्रयोग करें, जलन करने वाले उत्पादों से बचें
  • टैम्पॉन व पैड समय-समय पर बदलती रहें

स्वस्थ गर्भाशय ग्रीवा

हालाँकि गर्भाशय ग्रीवा छोटा सा अंग है, यह प्रजनन प्रक्रियाओं और घटनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि एचपीवी या किसी संक्रमण या कोशिकीय असामान्यता की रिपोर्ट आए तो घबराएं नहीं — आज चिकित्सा इतनी विकसित है कि अधिकतर गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जल्दी पहचाने जाने पर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। सबसे जरुरी है – वैक्सीनेशन कराएं, सुरक्षित यौन संबंध बनाएं, और नियमित जांच करवाती रहें।

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https://my.clevelandclinic.org/health/body/23279-cervix
https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/cervicitis/symptoms-causes/syc-20370814
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